Friday, November 16, 2018

نيوزلندا تخصص أكشاكا لاكتشاف سرطان الخصيتين

ل فكرت أبدا في إجراء فحص طبي لكنك قلقت من ذلك؟ حسنا، اخلع بنطالك، وقابل "تيستيماتك".
إنه كشك يسمح للرجال في نيوزلندا بفحص خصيتيهم، دون حرج من مواجهة طبيب.
ويعد سرطان الخصية أكثر أنواع السرطان انتشارا، بين الشباب في الدول الغربية، ويجري إطلاق تلك الأكشاك في معرض كبير، في مدينة أوكلاند.

ادخل الكشك، وأنزل بنطالك لأسفل، وسيقوم طبيب بفحصك دون أن تتواجها، وذلك من خلال ثقب صغير.
وسيطلق الكشك نهاية هذا الأسبوع، خلال معرض "بيغ بوي إكسبو"، وهو معرض ضخم معني بكل الأشياء التي يفترض أن يهتم بها الرجال.يضم المعرض أشياء، مثل السيارات والأدوات والأنشطة الرياضية ومعدات البناء.
ما ستفعله خلال الفحص هو: استجمع شجاعتك، ادخل إلى الكشك، اسحب ستارة حول جسمك، ثم أنزل بنطالك.
ما سيحدث بعد ذلك ليس نوعا من عمليات الفحص عالية التقنية، بدلا من ذلك، هناك طبيب مسالك بولية ذو خبرة يجلس داخل الكشك، وسيقوم عبر ثقب صغير بمد يده، وتحسس خصيتيك.
وخلال دقائق يمكنك الانصراف.
ويتماشى ذلك المشروع مع هدف منظمة مكافحة سرطان الخصيتين في نيوزلندا ، برفع الوعي بهذا المرض.
ومرض سرطان الخصيتين يتمتع بنسب عالية للغاية للشفاء، لكن الأمر يعتمد تماما على مدى الكشف عنه مبكرا.
ووفقا لأرقام المنظمة الخيرية، فإن 90 في المئة من الحالات يتم شفاؤها، وإذا اكتشفت مبكرا تزيد نسبة الشفاء لتصل إلى 99 في المئة.
وتقول هيئة الخدمات الصحية الوطنية في بريطانيا إن هذا النوع من السرطان هو الأكثر انتشارا، بين الرجال في سن ما بين 15 إلى 45 عاما، لكنها تشير إلى أن سرطان الخصيتين، في حد ذاته، "واحد من أقل أنواع السرطان انتشارا".
وتضيف الهيئة: "الأعراض الشائعة للمرض هي تورم غير مؤلم، أو انتفاخ في إحدى الخصيتين، أو أي تغيير في شكل أو ملمس إحدى الخصيتين".
وتشير بيانات الهيئة البريطانية إلى أن 2200 رجل تشخص إصابتهم بسرطان الخصيتين، في بريطانيا سنويا.
لكن منظمات معنية بمكافحة السرطان تحذر من أن كثيرا من الرجال لا يقومون بإجراء الفحوصات الدورية، وغير واعين بضرورتها.
ويقول معهد أبحاث السرطان في بريطانيا إن "سرطان الخصيتين أكثر انتشارا بين الذكور البيض، مقارنة بأقرانهم من الأسيويين أو السود".
بلغت خسائر شركة أوبرلخدمات تأجير السيارات 1.07 مليار دولار أمريكي خلال الأشهر الثلاثة المنتهية في نهاية سبتمبر، في الوقت الذي تستعد فيه الشركة لطرح أسهمها في البورصة للاكتتاب العام في السنة القادمة.
وارتفعت خسائر الشركة الأمريكية خلال الربع الأخير بشكل حاد، في حين لم تحقق إلا زيادة طفيفة في العائدات.
وكانت قيمة "أوبر" قدرت مؤخراً بنحو 72 مليار دولار، مما يجعلها واحدة من الشركات الخاصة الأعلى قيمة في العالم.
وتتعرض الشركة حالياً لضغوط من أجل زيادة الأرباح، إذا ما أرادت النجاح في تنفيذ خطتها بطرح أسهمها للاكتتاب العام في السنة القادمة.
وارتفعت الخسائر الصافية للشركة بشكل كبير من 891 مليون دولار لتصل إلى 1.07 مليار دولار حسب الأرقام التي كشفتها "أوبر"، في حين لم تشهد الإيرادات والحجوزات إلا ارتفاعاً طفيفاً. لكن خسائر الشركة انخفضت بنسبة 27% مقارنة مع نفس الفترة من العام الماضي، بحسب رويترز

Wednesday, October 10, 2018

विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तैयार, भास्कर लाया पहली संपूर्ण तस्वीर और वीडियो

  • 6 फीट के इंसान के कद से बड़े होंठ, आंखें और जैकेट के बटन, 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की हवाओं का भी असर नहीं
  • सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा तो सिर्फ चेहरा है, 70 फीट के हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा
  • सबसे कम वक्त में बनने वाली यह दुनिया की पहली प्रतिमा, अनावरण 31 अक्टूबर को

 इस प्रतिमा को बनाने वाले शिल्पकार पद्मश्री राम सुथार और उनके बेटे अनिल सुथार भी उस पल का इंतजार है, जब आम लोगों के लिए इस प्रतिमा का अनावरण होगा। सुथार बंधुओं ने बताया, "मोदीजी को सरदार की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने का विचार आया। उनकी सूचना के बाद काम आगे बढ़ा। अमेरिकन आर्किटेक्ट माइकल ग्रेस और टनल एसोसिएट्स कंपनी को भी हायर किया गया है। उन्होंने हमसे बहुत सारी जानकारियां ली। माइकल ग्रेस ने भारत में सरदार पटेल की सभी मूर्तियां को देखा और उनके बारे में पढ़ा।"

सरकार स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को पश्चिम भारत के सबसे शानदार पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। यहां पर्यटकों के लिए प्रतिमा के अलावा भी कई आकर्षण बनाए जा रहे हैं। पर्यटक यहां भी रुक सकेंगे।

अहमदाबाद.    सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति तैयार है। नर्मदा के बांध पर बनी यह मूर्ति सात किलोमीटर दूर से नजर आने लगती है। स्टैच्यू में लगी लिफ्ट से पर्यटक सरदार के हृदय तक जा सकेंगे। यहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा देख सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रतिमा का अनावरण 31 अक्टूबर को करेंगे।

यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसके बाद 128 मीटर ऊंची चीन की स्प्रिंग बुद्ध और न्यूयॉर्क की 90 मीटर ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का नंबर आता है। इसे  करीब 7 किमी दूर से देखा जा सकता है। इसकी संपूर्ण तस्वीर के लिए भास्कर के रिपोर्टर सात दिन तक निर्माण स्थल पर रहे। भास्कर मोबाइल एप आपको वो सब बताने जा रहा है, जिसे जानना आपको जरूरी है...
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल (60 माह) का वक्त लगा। सबसे कम समय में बनने वाली यह दुनिया की पहली प्रतिमा है। दुनिया की सबसे लंबी प्रतिमा चीन के लेशान में हैं। बुद्ध की 420 फीट ऊंची यह प्रतिमा करीब 90 साल में बनी थी।
चीफ इंजीनियर के मुताबिक, स्टैच्यू की निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से किया गया है। सरदार की प्रतिमा का आर्किटेक्चर इस तरह से बनाया गया है कि 6.5 की तीव्रता का भूकंप और 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की हवाओं वाले तूफान का भी इस पर कोई असर नहीं होगा।
शिल्पकार राम सुथार का कहना है कि प्रतिमा की सिंधु घाटी सभ्यता की कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुआें का उपयोग किया गया है जिसे बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबा इस्तेमाल किया गया है।
स्टैच्यू में लगी लिफ्ट की मदद से पर्यटक सरदार के ह्दय तक जा सकेंगे। वे यहां बनी गैलरी भी देख सकेंगे। गैलरी इस तरह से बनाई गई है कि इसे देखने वाले लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का मनोरम नजारा देख सकेंगे।
"उन्होंने अपने रिसर्च के बाद बताया कि सरदार पटेल के व्यक्तित्व, चाल, कपड़ों और चेहरे के हावभाव वाली सबसे सटीक मूर्ति अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लगी है। उन्होंने सरकार को बताया कि यह मूर्ति हमने बनाई है। इसके बाद सरकार की ओर से हमें फोन आया कि सरदार पटेल की एयरपोर्ट पर बनी प्रतिमा उनको पसंद आई है।"
 "उन्होंने पूछा कि क्या हम फोटोग्राफ या फिर प्रतिमा का उपयोग कर सकते हैं? इसके बाद मैंने जवाब दिया कि अगर आपको सरदार की प्रतिमा चाहिए तो मैं देने को तैयार हूं। इसके बाद जब भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी आए तो बताया गया कि सरकार ने सरदार पटेल की हमारी बनाई गई प्रतिमा का चयन किया है।"
सुतार बंधुओं ने बताया कि टेंडर मिलने के बाद निर्माण क्षेत्र की कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने हमसे संपर्क किया। फिर हम इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ गए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था कि चेहरा कैसा हो? इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने एक कमेटी बनाई। कमेटी में सात से दस लोग थे। सबसे अलग-अलग विचार थे। कुछ का कहना था कि फोटो में जैसे दिखते हैं वैसे ही कपड़े होने चाहिए।
उन्होंने बताया कि एलएंडटी ने 3डी चेहरा बनाया। उसके बाद हमने 30 फीट का चेहरा बनाया। इसके बाद कमेटी के सदस्य हमारे दिल्ली के ऑफिस में आए और सरदार के चेहरे को अप्रूव किया। एलएंडटी की सूचना पर हमने ब्रांज का चेहरा बनाकर दिया।
सुतार ने बताया कि इसके बाद चीन की एक कास्टिंग कंपनी को सरदार का चेहरा भेजा गया। उन्होंने वहां थर्माकोल की प्रतिमा बनाने को काम शुरू किया। इसके बाद हमें चीन जाकर काम देखने को कहा गया। हमने वहां देखा कि सरदार की प्रतिमा भी बुद्ध के जैसी लग रही थी। हमने कहा कि हमें सरदार की प्रतिमा वैसी चाहिए जैसा लोगों ने उन्हें देखा है। इसके बाद 2 मीटर X 2 मीटर के टुकड़े बनाकर कास्टिंग शुरू की गई।

Tuesday, September 25, 2018

विसंगतियों को दूर करने की पहल

ड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में प्रदत्त प्रावधान के आलोक में सात साल या उससे कम सज़ा के दंडनीय अपराध में आरोपी को अनावश्यक ही गिरफ्तार नहीं करने संबंधी न्यायिक व्यवस्था के बावजूद अजा-अजजा (उत्पीड़न से रोकथाम) कानून के तहत शिकायत होने पर तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान बहाल करने का सरकार का निर्णय चर्चा में है। इस कानून में तत्काल गिरफ्तारी संबंधी प्रावधान को लचीला बनाने और जांच के बाद ही किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने संबंधी शीर्ष अदालत की व्यवस्था को निष्प्रभावी करके पहले की स्थिति बहाल करने के बाद से कई राज्यों में आन्दोलन चल रहा है।
इस बीच, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने भी अजा-अजजा कानून के तहत दर्ज प्राथमिकी निरस्त कराने के लिये दायर याचिका पर सरकार से दोटूक शब्दों में कह दिया कि शीर्ष अदालत की 2014 की व्यवस्था का पालन किया जाये। राज्य सरकार के वकील ने भी 2014 की व्यवस्था का पालन करने का आश्वासन दिया है।
उच्च न्यायालय ने कहा है कि शीर्ष अदालत की व्यवस्था के आलोक में यदि अजा-अजजा कानून के तहत दर्ज शिकायत में लगे आरोपों के लिये सात साल तक की सज़ा हो सकती है तो सीधे गिरफ्तारी नहीं हो सकती। अजा-अजजा (उत्पीड़न से रोकथाम) संशोधन कानून की वैधानकिता पहले से ही न्यायिक समीक्षा के दायरे में है।
केन्द्र सरकार द्वारा आनन-फानन में संसद में इस कानून में संशोधन कर पूर्व स्थिति बहाल कराने की कवायद और इसके विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच एक सवाल है कि व्यक्ति की गिरफ्तारी से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के प्रावधानों के संबंध में उच्चतम न्यायालय की चार साल पुरानी व्यवस्था के आलोक में क्या अजा-अजजा कानून के तहत शिकायत दर्ज होने पर पुलिस आरोपी को फटाफट गिरफ्तार कर सकती है?
संशोधित कानून में धारा 18-ए शामिल करके उत्पीड़न की शिकायत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने या आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले मंजूरी लेने का निर्देश निष्प्रभावी बनाते हुए धारा 18 के प्रावधान बहाल किये गये हैं। कानून में शामिल धारा 18-ए के अनुसार प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच या जांच अधिकारी के लिए आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले, यदि जरूरी हो, मंजूरी लेना आवश्यक नहीं होगा। इसी तरह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 का प्रावधान भी इस कानून के तहत दर्ज मामले में लागू नहीं होगा।
न्यायमूर्ति चन्द्रमौली कुमार प्रसाद और न्यायमूर्ति पिनाकी चन्द्र घोष की पीठ ने दो जुलाई, 2014 को अपने फैसले में कहा था कि ऐसे सभी मामलों में जहां दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के उपबंधों के तहत व्यक्ति को गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं है तो ऐसे मामले में पुलिस अधिकारी को आरोपी को एक निश्चित स्थान और समय पर हाजिर होने के लिए नोटिस देना होगा तथा आरोपी नियत समय पर उपस्थित होने के लिए बाध्य है।
न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सात साल या उससे कम की सज़ा के दंडनीय अपराध के मामलों में पुलिस अधिकारी यांत्रिक तरीके से आरोपी को गिरफ्तार नहीं करे और पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में प्रदत्त पैमाने के तहत आरोपी की गिरफ्तारी की आवश्यकता के बारे में खुद को आश्वस्त करे।
शीर्ष अदालत की यह व्यवस्था हालांकि भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और दहेज निरोधक कानून की धारा चार के तहत दर्ज मामले में दी थी लेकिन उसने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ये निर्देश ऐसे सभी मामलों में लागू होगा, जिनमें आरोपी को दंडनीय अपराध के लिए सात साल या उससे कम की कैद और जुर्माने की सज़ा हो सकती है।
न्यायालय ने इस फैसले की प्रति सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल के पास अमल के लिए भेजने का भी निर्देश दिया था।
दरअसल, अजा-अजजा कानून के तहत अधिकांश शिकायतों में आरोप साबित होने पर छह महीने से लेकर पांच साल तक की सज़ा हो सकती है, लेकिन कुछ ऐसे भी आरोप हैं, जिसमें आरोपी को मौत की सज़ा देने तक का भी प्रावधान है।
अजा-अजजा कानून के तहत दर्ज शिकायत के आधार पर आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करने की आवश्यकता कहां है? एक सवाल यह भी है कि क्या अजा-अजजा कानून दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में प्रतिपादित मानदंड से बाहर है और यह प्रावधान अजा-अजजा कानून के तहत दर्ज शिकायतों के मामले में लागू नहीं होगा?
अजा-अजजा (उत्पीड़न की रोकथाम) कानून की धारा तीन में अत्याचार के अपराध के लिए सज़ा का प्रावधान है। इसमें कम से कम 15 ऐसे कृत्यों के उल्लेख हैं, जिनके लिए आरोपी को छह महीने से पांच साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है।

Thursday, September 6, 2018

सोशल मीडिया से गलत जानकारी फैलाने वाले चालाक, इनसे लोकतंत्र को बचाना हथियारों की दौड़ में शामिल होने जैसा: जुकरबर्ग

करबर्ग के मुताबिक, अब हम फेक न्यूज की जानकारी मिलने का इंतजार नहीं करते बल्कि खुद रखते हैं नजर

न्यूयॉर्क. फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वाले तेजी से बढ़ रहे हैं। फेसबुक की कोशिशों के बावजूद सोशल मीडिया पर ऐसे लोग हैं, जिनके पास पैसे की कमी नहीं है और जो समय के साथ चालाक होते जा रहे हैं। ऐसे में उनसे मुकाबला करने के लिए हमें हर दिन तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत होना पड़ रहा है। अब लोकतंत्र को बचाना हथियारों की दौड़ में शामिल होने जैसा है।
वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिखे गए अपने लेख में जुकरबर्ग ने कहा कि जब आप लोगों को जोड़ने की कोशिश करते हैं तो आपको अच्छाई के साथ सेवाओं की बुराई करने वाले भी दिखाई देते हैं। फेसबुक में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अच्छे और बुरे को अलग करें।
अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने वाले अभियानों का पता नहीं लगा सके : जुकरबर्ग ने कहा, "स्वतंत्र और साफ चुनाव हर लोकतंत्र में अहम है। 2016 चुनाव के दौरान हमने फेसबुक के जरिए ऐसे कई साइबर हमलों को नाकाम किया। लेकिन हम यह पता लगाने में नाकाम रहे कि अमेरिका की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ लोग बाहर काम कर रहे हैं। इसके बाद से ही हम लगातार चुनावों से छेड़छाड़ की कोशिश करने वालों के खिलाफ अपनी सुरक्षा बढ़ा रहे हैं।" इसी साल कुछ रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ था कि फेसबुक के जरिए हैकर्स ने अमेरिकी चुनावों को प्रभावित किया। इसके लिए जुकरबर्ग को अमेरिकी संसद के सवालों का सामना करना पड़ा था।
गलत जानकारियों के प्रसार पर रोक लगाना मकसद: फेक न्यूज और प्रोपेगंडा फैलाने वाले विज्ञापनों पर जुकरबर्ग ने कहा, "हम 2016 के बाद से सरकार, टेक कंपनियों और एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि फेसबुक का दुरुपयोग रोक पाएं। अब हम इंतजार नहीं करते कि कोई हमें फेक न्यूज या अजीब गतिविधियों के बारे में जानकारी देगा। बल्कि खुद ही चुनावों में संभावित नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री पर नजर रखते हैं और उन्हें डिलीट कर देते हैं। हाल ही में हमने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव से पहले गलत जानकारियां फैलाने वाले अकाउंट्स के एक नेटवर्क को खत्म किया।"
मध्यावधि चुनाव में सरकार के साथ रोकेंगे गड़बड़ियां: अमेरिका में इसी नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। इस पर जुकरबर्ग ने बताया, "पिछले कुछ समय में हमने फ्रांस, मैक्सिको, जर्मनी और इटली के चुनावों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए काम किया। हम अभी भी तकनीक में जरूरी निवेश कर रहे हैं, ताकि किसी भी खतरे से निपटा जा सके। जर्मनी में हमने सरकार के साथ मिलकर काम किया। हालांकि, हमारे दुश्मन भी तैयारी के साथ सामने आ रहे हैं। अमेरिका के लोकतंत्र को बचाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को एक साथ आगे आना होगा।"

Wednesday, August 29, 2018

在华企业无视水危机

据全球大型企业提供的数据撰写的年度全球水项目报告称,在华企业在应对水危机问题上滞后于全球同行。

众多在华企业报告称,它们的商业活动因水资源问题受到诸多负面影响,其中包括财产损失、形象受损以及高额的运营成本。

然而,没有一家在华企业就水资源给经营带来的影响做出过评估;也没有任何一家企业报告称设立了与水资源相关的目标,更没有企业清楚地说明它们是否面临供应链风险。

在中国这样一个水资源短缺,70%的淡水资源都多多少少受到污染的国家里,上述结果令最近曝出的不少丑闻令众多大型企业形象受损。阿玛尼、CK、玛莎百货和Zara等高档服装品牌都卷入了中国纺织业 严重水污染事件中。法国威立雅水务集团则陷入了兰州水污染事故中,该事故引起了大范围恐慌。

CDP今日发布了根据174个全球五百强企业提供的数据所撰写的年度全球水项目报告。根据报告,在全球范围内,企业面临的水危机正不断加剧,但企业对于提供危机相关信息的意愿却在下降。

报称受干旱、污染和其他水资源相关问题困扰的企业数量在不断增多。但调查中有近一半的企业未能向投资者公开披露其水危机评估结果。

对此,CDP的水资源项目主管凯特•兰姆表示:“公开率下降是令人失望的(比去年下降了6%)。这可能与我们重新设计了调查问卷有关,有一些企业在回答与流域水资源相关财务会计问题时,表现得很犹豫。”

但积极的一面是,向董事层汇报水危机的企业越来越多(从2013年的58%上升到62%)。“但与气候变化的报告相比,这个水平仍然很低。有92%的企业就气候变化问题设立了董事会监管。因此,要想提高对水危机的认识,还需要进一步的努力。”兰姆评价道。

在全球范围内,要求供应商披露其水危机应对信息的企业数量正在增多。

报告称,能源行业企业在披露这个问题上的透明度最差,而水资源和能源之间是紧密联系的,上述发现很令人吃惊。

中国面临的挑战

在华企业面临的水资源挑战只会更加严峻。中国水资源短缺已经迫使干旱地区的燃煤电站关停,未来也会限制可替代能源的发展,供应链也难免不受波及。

另外,有迹象表明中国政府将对污染者和污水排放采取更严格的措施,很可能对工业领域开出更高的罚金并制定更高的目标。 年,仅北京市政府就关闭了200家高污染、低效能的企业,这些企业都蒙受了巨大的经济损失。

近年来,中国公众在污染问题上越来越活跃,由于公众的不信任和反对,其他一些项目也被迫暂停。

兰姆表示,为数不多的向CDP披露信息的企业也是迫于顾客的要求。这表明在中国消费者是推动变革的主力,而非投资者。公众环境研究中心的马俊就是其中之一,他一直致力于帮助企业发现供应链上存在的水资源问题。

兰姆继续说:“我们希望中国最终能够强制企业开展水资源报告。政府如果毫无动作,就很难真正地推动变革。”

兰姆说,在印度的企业要比中国同行做得好,虽然它们报告的信息质量良莠不齐。


浏览更多CDP的水资源数据集和图像,请点击此处;阅读全球水项目报告,请点击此处。

Wednesday, August 8, 2018

करुणानिधि: तमिलनाडु के सबसे बड़े सियासी स्क्रिप्टराइटर

तमिलनाडु को सामाजिक और आर्थिक रूप से तरक़्क़ीपसंद राज्य बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा. भारतीय राजनीति में करुणानिधि का योगदान अतुलनीय है.
करुणानिधि का 94 साल की उम्र में निधन gambling
वो देश के सबसे सीनियर राजनेताओं में से एक थे. पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और क़रीब 60 साल तक विधायक रहे.
करुणानिधि निजी तौर पर कोई चुनाव नहीं हारे. करुणानिधि का जन्म आज के तमिलनाडु के नागापट्टिनम ज़िले एक निम्नवर्गीय परिवार में 3 जून 1924 को हुआ था.
मुथुवेल करुणानिधि ने बचपन में ही लिखने में काफ़ी दिलचस्पी पैदा कर ली थी. लेकिन, जस्टिस पार्टी के एक नेता अलागिरिसामी के भाषणों ने उनका ध्यान राजनीति की तरफ़ आकर्षित कर लिया.
स्कूल में 50 पन्नों की पनगल राजा रामरायानिंगर कहानी, जस्टिस पार्टी के एक नेता और मद्रास प्रेसीडेंसी के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने भी युवा करुणानिधि को प्रेरणा दी.
करुणानिधि ने किशोरावस्था में ही सार्वजनिक जीवन की तरफ़ क़दम बढ़ा दिए थे. उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी में स्कूल के सिलेबस में हिंदी को शामिल किए जाने के ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था.
17 साल की उम्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता काफ़ी बढ़ गई थी. करुणानिधि ने 'तमिल स्टूडेंट फ़ोरम' के नाम से छात्रों का एक संगठन बना लिया था और हाथ से लिखी हुई एक पत्रिका भी छापने लगे थे.
1940 के दशक की शुरुआत में करुणानिधि की मुलाक़ात अपने उस्ताद सीएन अन्नादुरै से हुई.
जब अन्नादुरै ने 'पेरियार' ईवी रामास्वामी की पार्टी द्रविडार कझगम (डीके) से अलग होकर द्रविड़ मुनेत्र कझगम यानी डीएमके की शुरुआत की, तब तक करुणानिधि उनके बेहद क़रीबी हो चुके थे.
उस वक़्त यानी महज़ 25 बरस की उम्र में करुणानिधि को डीएमके की प्रचार समिति में शामिल किया गया था.
इसी दौरान, करुणानिधि ने फ़िल्मी दुनिया में भी क़दम रखा. उन्होंने सबसे पहले तमिल फ़िल्म 'राजाकुमारी' के लिए डायलॉग लिखे. इस पेशे में भी करुणानिधि को ज़बरदस्त कामयाबी मिली.
सबसे ख़ास बात ये थी कि करुणानिधि के डायलॉग में सामाजिक न्याय और तरक़्क़ीपसंद समाज की बातें थीं. 1952 में आई फ़िल्म 'पराशक्ति' में करुणानिधि के लिखे ज़बरदस्त डायलॉग ने इसे तमिल फ़िल्मों में मील का पत्थर बना दिया.
फ़िल्म के शानदार डायलॉग के ज़रिए अंधविश्वास, धार्मिक कट्टरता और उस वक़्त की सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे.
कल्लाक्कुडी नाम की जगह का नाम बदलकर डालमियापुरम करने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के चलते करुणानिधि छह महीने के लिए जेल में डाल दिए गए.sex
इसके बाद से पार्टी में वो बहुत ताक़तवर होने लगे. अपने विचारों का ज़ोर-शोर से प्रचार करने के लिए करुणानिधि ने मुरासोली नाम के अख़बार का प्रकाशन शुरू किया. (यही अख़बार बाद में डीएमके का मुखपत्र बना) मलाईकल्लन, मनोहरा जैसी फ़िल्मों में अपने शानदार डायलॉग के ज़रिए करुणानिधि तमिल फ़िल्मी उद्योग में सबसे बड़े डायलॉग लेखक बन चुके थे.
करुणानिधि ने 1957 से चुनाव लड़ना शुरू किया था. पहले प्रयास में वो कुलिथलाई से विधायक बने. करुणानिधि ने अपना आख़िरी चुनाव 2016 में थिरुवारूर से लड़ा था. इस विधानसभा क्षेत्र में उनका पुश्तैनी गांव भी आता है. कुल मिलाकर करुणानिधि ने 13 विधानसभा चुनाव लड़े और हर चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की.
जब 1967 में उनकी पार्टी डीएमके ने राज्य की सत्ता हासिल की, तो सरकार में वो मुख्यमंत्री अन्नादुरै और नेदुनचेझियां के बाद तीसरे सबसे सीनियर मंत्री बने थे. डीएमके की पहली सरकार में करुणानिधि को लोक निर्माण और परिवहन मंत्रालय मिले थे. परिवहन मंत्री के तौर पर उन्होंने राज्य की निजी बसों का राष्ट्रीयकरण किया और राज्य के हर गांव को बस के नेटवर्क से जोड़ना शुरू किया. इसे करुणानिधि की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है.fuck
जब करुणानिधि के मेंटर सीएन अन्नादुरै की 1969 में मौत हो गई, तो वो मुख्यमंत्री बने. करुणानिधि के मुख्यमंत्री बनने से राज्य की राजनीति में नए युग की शुरुआत हुई थी.
करुणानिधि की पहली सरकार के कार्यकाल में ज़मीन की हदबंदी को 15 एकड़ तक सीमित कर दिया गया था. यानी कोई भी इससे ज़्यादा ज़मीन का मालिक नहीं रह सकता था.
इसी दौरान करुणानिधि ने शिक्षा और नौकरी में पिछड़ी जातियों को मिलने वाले आरक्षण की सीमा 25 से बढ़ाकर 31 फ़ीसदी कर दी. क़ानून बनाकर सभी जातियों के लोगों के मंदिर के पुजारी बनने का रास्ता साफ़ किया गया. राज्य में सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में कार्यक्रमों की शुरुआत में एक तमिल राजगीत (इससे पहले धार्मिक गीत गाए जाते थे) गाना अनिवार्य कर दिया गया.
19वीं सदी के तमिल नाटककार और कवि मनोनमानियम सुंदरानार की लिखी कविता को तमिल राजगीत बनाया गया. करुणानिधि ने एक क़ानून बनाकर लड़कियों को भी पिता की संपत्ति में बराबर का हक़ दिया.
उन्होंने राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण भी दिया. सिंचाई के लिए पंपिंग सेट चलाने के लिए बिजली को करुणानिधि ने मुफ़्त कर दिया. उन्होंने पिछड़ों में अति पिछड़ा वर्ग बनाकर उसे पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति कोटे से अलग, शिक्षा और नौकरियों में 20 फ़ीसदी आरक्षण दिया.
करुणानिधि की सरकार ने चेन्नई में मेट्रो ट्रेन सेवा की शुरुआत की. उन्होंने सरकारी राशन की दुकानों से महज़ एक रुपए किलो की दर पर लोगों को चावल देना शुरू किया. स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसद आरक्षण लागू किया. जनता के लिए मुफ़्त स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की. दलितों को मुफ़्त में घर देने से लेकर हाथ रिक्शा पर पाबंदी लगाने तक के उनके कई काम सियासत में मील के पत्थर साबित हुए.
करुणानिधि 19 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने इस दौरान 'सामाथुवापुरम' के नाम से मॉडल हाउसिंग स्कीम शुरू की. इस योजना के तहत दलितों और ऊंची जाति के हिंदुओं को मुफ़्त में इस शर्त पर घर दिए गए कि वो जाति के बंधन से आज़ाद होकर साथ-साथ रहेंगे. इस योजना के तहत बनी कॉलोनियों में सवर्ण हिंदुओं और दलितों के घर अगल-बगल बनाए गए थे.

Monday, June 4, 2018

कल हो सकता है कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार, ऊर्जा मंत्रालय को लेकर कांग्रेस-JDS में फंसा पेच

कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस की सरकार में मंत्री पद को लेकर चल रही रस्साकशी बुधवार को खत्म हो सकती है. बुधवार को कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. लेकिन अभी दोनों पार्टियों के तय कोटे के सभी मंत्री शपथ नहीं लेंगे, बताया जा रहा है कि अभी भी कुछ मंत्रालयों को लेकर पेच फंसा है.
सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टियां अपने-अपने कोटे के 2-3 पद खाली रखेगी. यानी बुधवार को शपथ होती है तो कांग्रेस के 22 में ले 19-20 और जेडीएस के 12 में से 9-10 मंत्री शपथ ले सकते हैं.
बताया जा रहा है कि ऊर्जा मंत्रालय को लेकर दोनों पार्टी में खींचतान चल रही है. अभी तक हुए बंटवारे के हिसाब से ऊर्जा मंत्रालय जेडीएस के पास है, लेकिन कांग्रेस इस मंत्रालय को रखना चाहती है.
इसी को लेकर कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया, मौजूदा डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर, वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे. आपको बता दें कि काफी खींचतान के बाद ये तय हुआ था कि कांग्रेस को 22 और जेडीएस को 12 मंत्री पद मिलेंगे.
किसे-कौन सा मंत्रालय?
कांग्रेस: गृह, सिंचाई, बेंगलुरु डेवलेपमेंट, उद्योग एवं शुगर इंडस्ट्री, स्वास्थ्य, राजस्व, समाज कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण जैसे 22 मंत्रालय रहेंगे.  
जेडीएस: सूचना विभाग, खुफिया विभाग, वित्त एवं आबकारी, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग, पर्यटन, कॉपरेशन, शिक्षा एवं मेडिकल शिक्षा, पशुपालन,  बागवानी,  छोटे उद्योग, परिवहन विभाग सहित 12 मंत्रालय जेडीए को मिले हैं.
बता दें कि राज्य में त्रिशंकु विधानसभा के बाद चले सियासी 'नाटक' और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जेडी-एस के नेता एच.डी.कुमारस्वामी ने 23 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. कांग्रेस व जेडीएस 25 मई को सदन में बहुमत साबित करने के बाद से सरकार गठन पर गहन चर्चा जारी रखे हुए थे.